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नियम एवं विनियम

प्रक्रिया और कार्यसंचालन विनयमावली - 1999

इन्दिरा भवन, तृतीय तल, अशोक मार्ग,

उत्तर प्रदेश, लखनऊ - 226001

उ0प्र0 पिछड़े वर्गो के लिये राज्य आयोग अधिनियम-1996 की धारा-8 की उपधारा-2 द्वारा प्रदत्त शक्तियों तथा समस्त अन्य सर्मथकारी शक्तियों का प्रयोग करके पिछड़े वर्गो के लिए राज्य आयोग निम्नलिखित विनियमावली बनाता है :-

  • यह विनयमावली उ0प्र0 पिछड़े वर्गो के लिए राज्य आयोग (प्रक्रिया और कार्य संचालन) विनियमावली-1999 कही जायेगी।
    • यह तुरन्त प्रवृत्त होगी।
  • अधिनियम" से तात्पर्य उ0प्र0 पिछड़े वर्गो के लिए राज्य आयोग अधिनियम-1996 से है।
    • आयोग" का तात्पर्य उ0प्र0 पिछड़े वर्गो के लिए राज्य आयोग अधिनियम-1996 की धारा-3 के अधीन गठित पिछड़े वर्गो के लिए राज्य आयोग से है।
    • अध्यक्ष" का तात्पर्य आयोग के अध्यक्ष से है।
    • सदस्य" से तात्पर्य आयोग के सदस्य के रूप में नियुक्त व्यक्ति से है और इसके अन्तर्गत आयोग से भी है।
    • समिति / पीठ" का तात्पर्य अध्यक्ष द्वारा सदस्यों से गठित समिति / पीठ से है।
    • सरकार" से तात्पर्य उ0प्र0 सरकार से है।
    • सचिव" से तात्पर्य राज्य सरकार द्वारा नियुक्त आयोग के सचिव से है।
  • सुनवाई अथवा अन्य कार्य हेतु गठित समिति / पीठ की बैठक भी आयोग की बैठक मानी जायेगी।
  • विनिमय- (3) में सन्दर्भित आयोग की बैठक के अतिरिक्त अन्य प्रयोजनार्थ :-
    • आयोग की बैठक समान्यतया प्रत्येक माह में पहली व पन्द्रह तारीख को होगी यदि उक्त दिवस में कार्यालय बन्द रहता है तो अगले कार्य दिवस में बैठक होगी। ऐसी बैठक के अतिरिक्त आवश्यकता होने पर आयोग की ऐसी बैठक अध्यक्ष किसी भी दिन बुलाने के निर्देश दे सकते है।
    • आयोग की ऐसी बैठक बुलाने के लिए किसी सदस्य के अनुरोध पर भी अध्यक्ष विचार करते हुए बैठक बुलाने के निर्देश दे सकते हैं।
    • आयोग की ऐसी बैठक की कार्य सूची सचिव के हस्ताक्षर से सभी सदस्यों के लिए उनके वैयक्तिक सहायकों को प्राप्त करायी जायेगी। सम्बन्धित वैयक्तिक सहायकों का कर्तव्य होगा कि वह सम्बन्धित सदस्य को ऐसी कार्य सूची से अवगत कराये वैयक्तिक सहायक को प्राप्त करायी गयी कार्यसूची सम्बन्धित सदस्य को प्राप्त होना माना जायेगा।
    • आयोग की बैठक की कार्यसूची वह होगी जो अध्यक्ष निर्धारित करेंगे। किसी सदस्य द्वारा कोई विषय आयोग की बैठक में रखने का यदि कोई अनुरोध बैठक की कार्यसूची सदस्यों को दिये जाने से पूर्व प्राप्त होता है तो ऐसे विषय को भी बैठक की कार्यसूची अध्यक्ष की अनुमति से सम्मिलित किया जा सकेगा।
    • आयोग की ऐसी बैठक की गणपूर्ति आयोग के तीन सदस्यों से होगी। बैठक के लिए गणपूर्ति न होने पर ऐसी बैठक किसी अन्य तिथि के लिए स्थगित कर दी जायेगी। जिसकी सूचना सभी सदस्यों को दी जायेगी। स्थगित की गयी बैठक के लिए दो सदस्यों को गणपूर्ति पूरा होना माना जायेगा।
    • आयोग की बैठक में निर्णय यदि सव्र सम्मति से नहीं होता तो बहुमत के अनुसार निर्णय जो होगा वह आयोग का निर्णय माना जायेगा। यदि मत बराबर हो तो अध्यक्ष को निर्णायक मत देने का अधिकार होगा, जो उनके सामान्य मत के अतिरिक्त होगा।
  • आयोग की बैठक सामान्यतया आयोग के मुख्यालय, लखनऊ में होगी। परन्तु आयोग की बैठक मुख्यालय से बाहर किसी अन्य स्थान पर भी करने में कोई बाधा नही होगी।
  • समिति / पीठ
  • आयोग के सदस्यों के बीच कार्य का बंटवारा अध्यक्ष द्वारा किया जायेगा। कार्यो को निपटाने के लिए अध्यक्ष सदस्यों की एक सदस्यीय / बहुसदस्यीय समिति / पीठ का एक या अधिक गठन कर सकते है। आवश्यकतानुसार अध्यक्ष द्वारा कार्य विभाजन में परिवर्तन या उपान्तर किया जा सकता है। ऐसी समिति / पीठ जिसमें अध्यक्ष सम्मिलित न हो, कि संस्तुति अध्यक्ष के समक्ष अनुमोदनार्थ प्रस्तुत की जायेगी और अध्यक्ष द्वारा अनुमोदन किये जाने पर समिति / पीठ की ऐसी संस्तुति आयोग द्वारा की गयी संस्तुति मानी जायेगी। यदि समिति / पीठ की संस्तुति पर अध्यक्ष अनुमोदन देना उपयुक्त न नाये तो ऐसी संस्तुति को आयोग की बैठक में विचारार्थ रखा जायेगा। परन्तु अन्य किसी नियम में अन्यथा प्राविधान होते हुए भी प्रतिबन्ध यह होगा कि ऐसी संस्तुति पर विचार किसी बैठक में किया जा सकेगा जिसमें सम्बन्धित समिति / पीठ के सदस्यों व अध्यक्ष के अतिरिक्त अन्य कोई सदस्य उपस्थित हो। उस बैठक में लिये गये निर्णय को आयोग की संस्तुति माना जायेगा।
  • बैठक की सूचना देने के सम्बन्ध में
  • प्रत्येक पहली व पन्द्रह तारीख बैठक के अतिरिक्त आयोग की अन्य बैठक की तिथि की सूचना सम्बन्धित सदस्यों के सचिव द्वारा दी जायेगी। यह सूचना सचिव के न रहने पर उनके द्वारा अधिकृत अधिकार द्वारा भी दी सकती है। अपरिहार्य परिस्थितियों में अध्यक्ष अपने कैम्प के माध्यम से भी नोटिस जारी कर सकते है।
  • अधिनियम की धारा-9(1) के सम्बन्ध में प्राप्त प्रत्यावेदनों के निस्तारण की प्रक्रिया
  • इससे सम्बन्धित प्रत्यावेदन का प्रारम्भिक परीक्षण तथा आयोग के विचार हेतु आस्था प्रस्तुत करने का कार्य उस सदस्य द्वारा किया जायेगा जिसे प्रत्यावेदन अध्यक्ष द्वारा भेजा जायेगा।
  • एक माह में विभिन्न जातियों के प्राप्त प्रत्यावेदनों के सम्बन्ध में प्रारम्भिक प्राथमिकता का निर्धारण अगले माह के प्रथम सप्ताह में होने वाली आयोग की बैठक में किया जायेगा।
  • प्राथमिकता निर्धारण के उपरान्त सार्वजनिक सूचना के माध्यम से क्रमिक रूप से तिथिवार प्राप्त प्रत्यावेदनों की प्रारम्भिक सुनवाई हेतु आयोग की ओर से सर्वजानिक सूचना प्रकाशित की जायेगी। ऐसी सार्वजनिक सूचना दैनिक समाचार-पत्र जिसका सम्बन्धित क्षेत्र में प्रसार हो, प्रकाशित की जायेगी। इसके अतिरिक्त सम्बन्धित प्रत्यावेदनकताओं को सुनवाई की सूचना पत्र द्वारा भेजी जायेगी।
  • प्रारम्भिक सुनवाई आयोग द्वारा की जायेगी। सुनवाई के पश्चात् आयोग यदि प्रत्यावेदन पर आगे कार्यवाही करना उपयुक्त नहीं पाए तो प्रकरण को समाप्त कर दिया जायेगा। यदि आयोग आगे कार्यवाही करना उपयुक्त नहीं पाए तो प्रकरण को समाप्त कर दिया
  • आयोग के सर्वेक्षण प्रभाग द्वारा स्थानीय जाँच एवं सर्वेक्षण सम्बन्धित जाति / वर्ग के सम्बन्ध के सम्बन्ध में किया जायेगा। ऐसे सर्वेक्षण एवं स्थानीय जाँच के लिए आयोग के सर्वेक्षण प्रभाग के अतिरिक्त अध्यक्ष द्वारा इस कार्य हेतु नामित द्विसदस्यीय समिति भी सम्बन्धित क्षेत्र में भ्रमण करके जानकारी कर सकेगी। ऐसे भ्रमण में समिति विभिन्न समुदायों के लोगों से भी जानकारी प्राप्त कर सकेगी। समिति द्वारा की गयी जाँच रिपोर्ट में इसका पूर्ण विवरण दिया जानकारी प्राप्त कर सकेगी। समिति द्वारा की गयी जाँच रिपोर्ट में इसका पूर्ण विवरण दिया जायेगा जिसमें उन नागरिकों / संस्थाओं व क्षेत्र का नाम होगा, जिनसे बातचीत व जानकारी की गयी। सर्वेक्षण प्रभाग द्वारा किये जाने वाले सर्वेक्षण की ऐसी प्रश्नावली में आवश्यक रूप से सम्बन्धित अन्य निर्धारित प्रश्नों के अतिरिक्त निम्नलिखित प्रश्न होगें।
    • सम्बन्धित समुदाय में ऐतिहासिक, भौगौलिक एवं संस्कृति पृष्ठभूमि और सामान्य जानकारी के सम्बन्ध में।
    • सम्बन्धित समुदाय के सम्बन्ध में ऐतिहासिक, भौगौलिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और सामान्य जानकारी के सम्बन्ध में।
    • परिवार के विभिन्न पहलुओं सम्बन्धी
    • सर्वेक्षण प्रभाग की रिपोर्ट व समिति की रिपोर्ट (यदि समिति ने भी जाँच किया हो) प्राप्त हो जाने के पश्चात प्रकरण अन्तिम सुनवाई हेतु तिथि निश्चित की जायेगी। जिसकी सार्वजनिक सूचना दो दैनिक समाचार-पत्रों में जिनका सम्बन्धित क्षेत्र में प्रसार हो प्रकाशित की जायेगी तथा प्रार्थी व आपत्तिकर्ता (यदि काई हो) को कार्यालय द्वारा सूचना नोटिस भेजकर दी जायेगी।
    • अन्तिम सुनवाई आयोग द्वारा की जायेगी जिसमें कम से कम तीन सदस्यों (जिनमें अध्यक्ष सम्मिलित होंगे) की उपस्थिति आवश्यक होगी। ऐसी सुनवाई के समय प्रत्यादवेदनकर्ता या आपत्तिकर्ता (यदि कोई हो) द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य को लिया जायेगा और पक्षकारों को तर्क प्रस्तुत करने का अवसर दिया जायेगा।
    • सुनवाई करने वाली समिति द्वारा प्रत्यावेदन पर संस्तुति स्थल जाँच रिपोर्ट आदि तथा अन्य उपलब्ध कराये गये तथ्य जानकारी एवं आँकड़े एवं साक्ष्य को विचार में लेते हुए की जायेगी। यदि कोई सदस्य अपनी भिन्न संस्तुति करे तो आयोग की बैठक में उस पर विचार किया जायेगा और विचार-विमर्श के पश्चात आयोग की संस्तुति को अन्तिम रूप दिया जायेगा।
    • आयोग की संस्तुति प्रदेश शासन को प्रेषित किया जायेगा
  • अधिनियम की धारा-9(1)(ख) से सम्बन्धित मामलों के लिए प्रक्रिया निम्नलिखित प्रकार होगी :-
    • पिछड़े वर्गो के लिए उपबन्धित रक्षोपायों से सम्बन्धित सभी मामलों का अन्वेषण एवं मूल्यांकन आयोग द्वारा सर्वेक्षण एवं मूल्यांकन प्रभाग के अन्वेषण अधिकारियों से विभाग / संस्थावार कराया जायेगा और सम्बन्धित विभाग यह कार्य अध्यक्ष द्वारा नामित सदस्य / समिति के मार्ग-दर्शन / निर्देश के अधीन किया जायेगा।
    • अन्य पिछड़े वर्गो के लिए हित रक्षण उपायों की मास्टर चेक लिस्ट विभाग / संस्थावार तैयार करना आवश्यक होगा। इसके साथ ही इसके सम्बन्ध में विभिन्न पहलुओं के आंकड़े भी एकत्रित करने होगें। इस कार्य हेतु सर्वेक्षण एवं मूल्यांकन प्रभाग के सर्वेक्षण एवं अन्वेषण अधिकारी को आवश्यकतानुसार अध्यक्ष द्वारा अधिकृत सदस्य / समिति मार्ग-दर्शन प्रदान करेगी।
    • आयोग के सर्वेक्षण एवं शोध अधिकारियों द्वारा संस्थावार अन्वेषण और मूल्यांकन की रिपोर्ट तैयार की जायेगी। उन्ही के द्वारा निश्चित समयागीय में अनुश्रवण करने की प्रणाली भी विकसित की जायेगी। इस कार्य हेतु सम्बन्धित कर्मचारी एवं अध्यक्ष द्वारा नामित / अधिकृत सदस्य विभिन्न स्तरों में भाग लेने के सम्बन्ध में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में सम्बन्धित संस्था / विभाग की इकाईयों का भ्रमण कर अधावधिक अनुश्रवण रिपोर्ट आयोग के विश्लेक्षण एवं संस्तुति हेतु प्रस्तुत करेंगे।
    • अध्यक्ष द्वारा अधिकृत सदस्य / समिति इन अनुश्रवण रिपार्ट प्रदेश शासन को प्रेषित करेगा।
    • ऐसी रिपोर्ट पर आयोग विचारोपरान्त संस्तुतति प्रदेश शासन को प्रेषित करेगा।
    • आयोग विभिन्न विभागों / संस्थाओं से पिछड़े वर्गो के रक्षापायों के सम्बन्ध में सम्बन्धित विभाग / संस्थाओं द्वारा की गयी कार्यवाही के विवरण भी मंगा सकेगा।
  • अधिनियम की धारा-9(1)(ग) पिछड़े वर्गो के अधिकारों और रक्षापायों से वंचत किये जाने के सम्बन्ध में विशिष्ट शिकायतों के सम्बन्ध में प्रक्रिया :-
    • शिकायत प्राप्त होने पर अध्यक्ष द्वारा उसे किसी सदस्य को चिन्हित किया जा सकता है। ऐसे सदस्य द्वारा शिकायत का परीक्षण करने पर यह पासा जाए कि शिकायत के सम्बन्ध में जाँच / सुनवाई करना उपयुक्त होगा तो उसके लिए एतदपश्चचात उपबन्धित व खण्ड (ख) व (ग) के अनुसार कार्यवाही की जायेगी। यदि शिकायत का प्रारम्भिक परीक्षण करने यह पाया जाये कि उस पर कार्यवाही की आवश्यकता नहीं है तो ऐसे मामले को आयोग की बैठक में रखकर विचार किया जायेगा। विचारोपरान्त यदि शिकायत पर आयोग द्वारा कार्यवाही किया जाना उपयुक्त न पाया जाय तो ऐसी शिकायत को पत्रावलित कर दिया जायेगा। बैठक में यदि उस शिकायत के सम्बन्ध में जाँच / सुनवाई का निर्णय किया जाय तो एतद्पश्चात उपबन्धित खण्ड- (ख), (ग) व (घ) के अनुसार जाँच / सुनवाई की जायेगी।
    • जिस शिकायत के सम्बन्ध में जाँच / सुनवाई किए जाने का विनिश्चत हो, उसके सम्बन्ध में सम्बन्धित अधिकारी / प्राधिकारी को शिकायती-पत्र की प्रति भेजते हुए उस पर आख्या चार प्रतियों में निर्धारित अवधि तक उपलब्ध कराने की अपेक्षा की जायेगी। इन सम्बन्ध में नोटिस ऐसे प्रपत्र पर भेजी जायेगी जैसे कि आयोग निर्धारित करे। आख्या प्राप्त हो जाने पर अथवा अवसर दिये जाने के बावजूद आख्या न दिये जाने पर सुनवाई की तिथि निर्धारित की जायेगी जिसकी लिखित सूचना सम्बन्धित व्यक्तियों को ऐसे प्रपत्र पर, जैसा कि आयोग निर्धारित करें, भेजी जायेगी। सुनवाई की प्रथम तिथि अध्यक्ष द्वारा निश्चित की जायेगी।
    • जाँच / सुनवाई आयोग की समिति / पीठ करेगी। आवश्यकतानुसार इस जाँच से सम्बन्धित त्वरित रूप से किसी संस्था / विभाग से जानकारी / आंकड़े आदि प्राप्त करने हेतु आयोग को और उत्तरदायी अधिकारी / कर्मचारी भेजे जा सकते है जो कि इन जानकारियों / आंकड़ों की आयोग की जाँच की आवश्यकता के अनुसार यथाशीघ्र एकत्रित करेगें और मुख्यालय पर सम्बन्धित समिति / पीठ के समक्ष प्रस्तुत करेगें।
    • सम्बन्धित समिति / पीठ द्वारा इस प्रकार की विशिष्ट जाँच की सुनवाई में सभी तर्कसंगत रूप से आवश्यक प्रक्रियाएं अपनायी जायेगी। इसमें शिकायतकर्ता एवं विरोधी पक्ष को बुलाकर आमने-सामने उनके पक्ष को सुनना तथा एक दूसरे के उठाये गये बिन्दुओं पर बहस करने का अवसर प्रदान करना तथा अन्य नैसर्गिक न्याय के सभी नियमों को अपनाया जाना सम्मिलित है।
    • सम्बन्धित शिकायत पर आयोग की संस्तुति सरकार के सम्बन्धित विभाग के प्रमुख सचिव / सचिव के पास अपेक्षित कार्यवाही हेतु प्रेषित किया जायेगा।
    • स्वायत्तशासी संस्थाओं से सम्बन्धित शिकायतों पर आयोग की संस्तुति की प्रति स्वायत्तशासी संस्था के प्रमुख (विभागाध्यक्ष) को भी प्रेषित की जायेगी।
  • अधिनियम की धारा-9(1)(घ) के सम्बन्ध में प्रक्रिया :-
    • आर्थिक विकास की योजना प्रक्रिया में भाग लेने और उन पर सम्बन्धित बैठक में सलाह देने के लिए अध्यक्ष ऐसे एक या ए‍क से अधिक सदस्यों को जैसे वह उचित समझें इस निमित्त अधिकृत कर सकते है। ऐसे अधिकृत सदस्य / सदस्यगण बैठक की कार्यवाही एवं उसमें अपने द्वारा दी गयी सलाह की लिखित रिपोर्ट अध्यक्ष का प्रस्तुत करेंगे।
    • आयोग की ओर से ऐसी योजना प्रक्रिया सम्बन्धित विषय पर यदि सलाह भेजे जाने की आवश्यकता हो तो उसे आयोग ने बैठक में विचार विमर्श के पश्चात भेजा जायेगा।
    • पिछड़े वर्गो के सामाजिक आर्थिक विकास के प्रगति का मूल्यांकन हेतु आयोग सम्बन्धित विभाग / प्राधिकारी / संस्था से इस सम्बन्ध में सूचना प्राप्त करेगा और तथ्यात्मक सूचना प्राप्त होने के पश्चात उसके मूल्यांकन हेतु विषय को आयोग की बैठक में रखा जायेगा।
  • अधिनियम की धारा-9(1)(ड़) से सम्बन्धित प्रक्रिया :-
    • आयोग के प्रत्येक वर्ष के सम्पूर्ण कार्यो का विवरण सहित रिपोर्ट अध्यक्ष के दिशानिर्देशों पर सचिव द्वारा तैयार करायी जायेगी एवं रिपोर्ट पर आयोग की सहमति के उपरान्त शासन को प्रत्येक वर्ष में प्रेषित की जायेगी।
  • अधिनियम 9(1) च पिछड़े वर्गो के संरक्षण, कल्याण, सामाजिक, आर्थिक विकास के सम्बन्ध में राज्य सरकार को सिफारिश किया जाना यह कार्य धारा-9(1)(ख) से अच्छदित है। अत: असी प्रक्रिया अनुसार किया जायेगा।
  • अधिनियम की धारा-9(1)(छ) से पिछड़े वर्गो के संरक्षण, कल्याण, विकास और अभिव्यक्ति के सम्बन्ध में :-
    • इसका दायित्व निर्वहन समय-समय पर राज्य सरकार द्वारा निर्दिष्ट किये जाने पर आयोग द्वारा किया जायेगा।
    • इस उत्तरदायित्व का निर्वहन (जाँच, विश्लेषण, रिपोर्ट की संरचना आदि) आयोग की अधिकृत समिति के मार्ग-दर्शन के अधीन किया जायेगा। यदि इसमें संख्या विशेष के आंकड़े, तथ्यों को एकत्रित करना भी सम्मिलित है तो ऐसा दायित्व अध्यक्ष के मार्ग-दर्शन में निर्वहन किया जायेगा।
    • समिति की रिपोर्ट आयोग के समक्ष, प्रस्तुत की जायेगी। तदुपरान्त आयोग अपनी संस्तुति शासन को प्रेषित करेगा।
  • इस विनियमावली में प्रदिष्ट प्रक्रिया के अतिरिक्त आवश्यकता होने पर आयोग अपनी बैठक में निर्णय लेते हुए विशिष्ट विषयों अथवा विषयवस्तु के सम्बन्ध में प्रक्रिया निर्धारित कर सकेगा।
    • (रामसूरत सिंह), अध्यक्ष
    • (परमदेव यादव), सदस्य
    • (लालचन्द्र कुशवाहा), सदस्य
    • (पी.के. सरीन) सदस्य
    • (सरला शाक्य) सदस्य